Breaking News
पौड़ी को जाम से मिलेगी राहत, 300 वाहनों की क्षमता वाली बहुमंजिला पार्किंग की तैयारी तेज
पौड़ी को जाम से मिलेगी राहत, 300 वाहनों की क्षमता वाली बहुमंजिला पार्किंग की तैयारी तेज
लोहाघाट में 257 करोड़ की लागत से बन रहा बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज, डीएम ने किया निरीक्षण
लोहाघाट में 257 करोड़ की लागत से बन रहा बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज, डीएम ने किया निरीक्षण
निर्माणाधीन भवन में मिला पंजाब निवासी 52 वर्षीय व्यक्ति का शव, पांचवीं मंजिल से गिरने की आशंका
निर्माणाधीन भवन में मिला पंजाब निवासी 52 वर्षीय व्यक्ति का शव, पांचवीं मंजिल से गिरने की आशंका
शेरपुर में सेवा संकल्प अभियान के तहत दिव्यांग शिविर आयोजित, 208 लोगों ने उठाया स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ
शेरपुर में सेवा संकल्प अभियान के तहत दिव्यांग शिविर आयोजित, 208 लोगों ने उठाया स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ
रुड़की में अवैध तमंचों की खरीद-फरोख्त का खुलासा, दो युवक गिरफ्तार
रुड़की में अवैध तमंचों की खरीद-फरोख्त का खुलासा, दो युवक गिरफ्तार
विधानसभा सत्र के लिए गैरसैंण आगमन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भव्य स्वागत
विधानसभा सत्र के लिए गैरसैंण आगमन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भव्य स्वागत
मिठाई की ट्रे पर निर्माण और एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य, देहरादून में 27 दुकानों की जांच
मिठाई की ट्रे पर निर्माण और एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य, देहरादून में 27 दुकानों की जांच
पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और सैनिक परिवारों का सम्मान हमारा नैतिक दायित्व: कैबिनेट मंत्री
पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और सैनिक परिवारों का सम्मान हमारा नैतिक दायित्व: कैबिनेट मंत्री
पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और सैनिक परिवारों का सम्मान हमारा नैतिक दायित्व: कैबिनेट मंत्री
पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और सैनिक परिवारों का सम्मान हमारा नैतिक दायित्व: कैबिनेट मंत्री
बांग्लादेश: लोकतंत्र का प्रहसन?

चुनावों की वैधता इससे तय होती है कि उसमें विकल्प के रूप में जनता के सामने विभिन्न दल मौजूद हों और सभी दलों को चुनाव के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होने का भरोसा हो। जबकि बांग्लादेश में विपक्ष चुनाव का बहिष्कार कर रहा है। बांग्लादेश में रविवार यानी सात जनवरी को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। मगर यह ऐसा चुनाव है, जिसका नतीजा लगभग पहले से तय है। कारण यह है कि देश की मुख्य विपक्षी पार्टियां चुनाव का बहिष्कार कर रही हैं। उन पार्टियों के कई नेता जेल में हैं। शेख हसीना की अवामी लीग 2009 में सत्ता में आई थी। 2014 के चुनाव में वह फिर जीती, लेकिन तब विपक्ष ने उस पर बड़े पैमाने पर धांधली करने का आरोप लगाया। 2019 में विपक्षी दलों- खासकर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएऩपी) ने मांग की कि पहले की तरह तटस्थ चुनाव कराने की परिपाटी फिर से अपनाई जाए।

प्रधानमंत्री शेख हसीना इसके लिए राजी नहीं हुईं, तो बीएनपी ने चुनाव का बहिष्कार किया। वही कहानी 2024 में दोहराई जा रही है। लेकिन क्या इसे लोकतंत्र कहा जाएगा? चुनावों की वैधता इससे तय होती है कि उसमें विकल्प के रूप में जनता के सामने विभिन्न दल मौजूद हों और सभी दलों को चुनाव के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होने का भरोसा हो। जबकि बीएनपी और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि उन्हें यह यकीन नहीं है कि शेख़ हसीना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराएंगी। यह आरोप भी है कि शेख़ हसीना पिछले कुछ सालों में निरंकुश हो गई हैं। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र के दूतों के एक समूह ने भी बीते नवंबर में कहा था कि बांग्लादेश में न्यायिक सिस्टम का हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके तहत आलोचक पत्रकारों, मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं आदि को निशाना बनाया गया है।

समूह ने कहा कि देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता कम हुई है और मूलभूत मानवाधिकारों का हनन बढ़ा है। शेख हसीना और उनकी पार्टी ऐसे इल्जामों को सिरे से खारिज करती हैं। पार्टी के इस दावे में दम है कि अपने 15 साल के शासनकाल में उसने बांग्लादेश की आर्थिक सूरत बदल दी है। साथ ही उसने समाज में कट्टरपंथी गुटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। मगर प्रश्न है कि अगर अवामी लीग को अपनी उपलब्धियों पर इतना भरोसा है, तो उसे विपक्ष को चुनाव में पराजित कर देने का यकीन क्यों नहीं है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top