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लद्दाख हिंसा पर कांग्रेस का हमला, प्रमोद तिवारी बोले- दमन से नहीं वादों को निभाने से निकलेगा हल

लेह हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण, प्रशासन ने धारा 163 लगाई, पाबंदियों से आम लोग परेशान

लेह। लद्दाख में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने वादों को पूरा करने के बजाय हालात को और खराब कर दिया है। उनका कहना है कि गिरफ्तारियां और दमनकारी कदम किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं, बल्कि जनता से किए गए वादों को निभाना ही असली हल है।

कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि केंद्र ने राज्य का दर्जा बहाल करने और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर लद्दाख को भी समान अधिकार देने का वादा किया था। लेकिन इन वादों को पूरा करने के बजाय सरकार ने विरोध कर रहे लोगों को दबाने का रास्ता चुना। तिवारी ने कहा कि मणिपुर के हालात सरकार दो साल से नहीं संभाल पाई और अब लद्दाख में भी स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

हिंसा और पाबंदियां
24 सितंबर को लेह में भड़की हिंसा के बाद प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी, जिसके तहत पांच से अधिक लोगों के जुटने पर रोक लगा दी गई है। इलाके में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती है और बिना अनुमति जुलूस, मार्च या रैली पर प्रतिबंध लगाया गया है।

स्थानीय लोगों की मुश्किलें
प्रतिबंधों के कारण आम जनता को दूध और खाद्यान्न जैसी ज़रूरी चीजें तक नहीं मिल पा रही हैं। लोग सुरक्षा घेरे में रहते हुए मुश्किल हालात में अपने रोज़मर्रा के काम निपटाने की कोशिश कर रहे हैं।

हिंसा की घटनाएं और गिरफ्तारियां
हिंसा के दौरान भाजपा कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। इसके दो दिन बाद पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को हिंसा भड़काने के आरोप में एनएसए के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेज दिया गया।

वांगचुक की मांगें
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। वे भूख हड़ताल पर भी थे, हालांकि हिंसा शुरू होने के बाद उन्होंने इसे खत्म कर दिया। छठी अनुसूची अभी असम, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में लागू है, जिसके तहत आदिवासी इलाकों को विशेष अधिकार प्राप्त हैं।

कांग्रेस का रुख
तिवारी ने कहा कि लद्दाख भारत की संवेदनशील सीमा पर स्थित है और यहां आंतरिक अशांति से पड़ोसी देशों को फायदा मिल सकता है। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि दमन और गिरफ्तारियां शांति बहाल नहीं कर सकतीं। लद्दाख में समाधान केवल संवाद और भरोसे से ही निकलेगा।

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