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हर साल मई के पहले मंगलवार को मनाया जाने वाला विश्व अस्थमा दिवस लोगों को श्वसन संबंधी बीमारी अस्थमा के प्रति जागरूक करने का अवसर देता है। इस दिन का उद्देश्य न सिर्फ बीमारी की पहचान और इलाज को बेहतर बनाना है, बल्कि बदलते मौसम में इसके खतरों से बचाव के उपायों को भी सामने लाना है।

अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सांस की नलियों में सूजन के कारण सांस लेने में कठिनाई होती है। धूल, धुआं, प्रदूषण और एलर्जी इसके प्रमुख कारण हैं। आमतौर पर सर्दियों को अस्थमा के लिए ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है, लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि तेज गर्मी भी मरीजों के लिए उतनी ही चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र सचान के अनुसार, मौसम में अत्यधिक ठंड या गर्मी—दोनों ही स्थितियां अस्थमा के मरीजों के लिए खतरनाक हो सकती हैं। बढ़ते तापमान के साथ हवा में ओजोन और प्रदूषक तत्वों का स्तर बढ़ जाता है, जो सांस की नलियों को प्रभावित करते हैं और अटैक का खतरा बढ़ा देते हैं।

गर्मियों में डिहाइड्रेशन भी एक बड़ी समस्या बन जाता है। शरीर में पानी की कमी होने से फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा उमस और खराब एयर क्वालिटी भी अस्थमा को ट्रिगर करने वाले अहम कारक हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मी के दिनों में अस्थमा रोगियों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। घर में साफ-सफाई बनाए रखना, एसी और कूलर के फिल्टर नियमित साफ करना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनहेलर और दवाओं का उपयोग करना और बाहर निकलते समय मास्क पहनना भी काफी हद तक जोखिम को कम कर सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के साथ सतर्कता और सही देखभाल से अस्थमा के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

(साभार)

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