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अब आकाशवाणी बन रहा है, वाणिज्यिक प्रसारण

देहरादून। आज के समय में जब मीडिया के बड़े घराने अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए ब्रेकिंग न्यूज़ बनाकर शहरी और बड़ी खबरों को चलाते हैँ, उन सब में दूरदर्शन और आकाशवाणी सटीक खबरें प्रस्तुत करते हैँ। आकाशवाणी जो की आम जनो की बात को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाती हैँ, जो गाँव की झलक और वंहा की स्थलीय रिकॉर्डिंग कर वहां कि समस्याओ को पहुँचाया करती हैँ।

आज भी उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में आँचलिक कार्यक्रमो को सुनने के लिए इंतजार करते हैँ। लेकिन सूत्रों के हवाले मिली जानकारी के अनुसार अब ग्रामीण आँचल के कार्यक्रम और उनसे जुड़ी धरातलीय और स्थलीय मुद्दों और समस्याओ को सुनना कम हों सकता हैँ। आम जन मानस कि आकाशवाणी जिसके माध्यम से उत्तराखंड के लोक रंग जैसे स्थलीय पर्व, त्यौहार, कार्यक्रम, रीति रिवाज, परम्परा, लोक जात्राओं कि रिकॉर्डिंग के लिए अब आकाशवाणी निजी रेडिओ कि तरह व्यवसयिक बनने कि नीति पर काम कर रहा हैँ। कयास लगाये जा रहे हैँ कि आने वाले समय में आकाशवाणी से अब स्थलीय स्तर पर रिकॉर्डिंग किये गए आँचलिक कार्यक्रम सुनने को नहीं मिल पायेगे।
आकाशवाणी देहरादून से प्रस्तुत होने वाले लोक प्रिय कार्यक्रम जिनमें उत्तराखंड के दूरस्थ गाँव की रिकॉर्डिंग हों या उनकी स्थलीय समस्या यँहा कि लोक संस्कृति हों या ग्राम झांकी, किलकारी, या कोई मेले त्यौहार इन सबको श्रोता बहुत ध्यान से सुनता ही नहीं हैँ बल्कि इनको बहुत पसंद भी करता हैँ।

यदि आकाशवाणी भी निजी रेडिओ चैनलों कि तरह कार्यक्रम रिकॉर्डिंग करवाने कि प्रक्रिया शुरू करता हैँ या कोई नीति बनाता हैँ तों फिर ग्रामीण आँचल के कार्यक्रम रिकॉर्डिंग श्रोताओं को सुनने के लिए मिलना मुश्किल हो सकता हैँ।

यदि आम जनमानस का लोकप्रसारक आकाशवाणी यदि व्यावसायिक हो जाता है तों फिर ग्रामीण क्षेत्रों कि स्थलीय रिकॉर्डिंग सुनने से श्रोता वंचित हों जायेगे।

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