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दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैसला: 14 साल के बच्चे से कुकर्म और वीडियो वायरल करने वाले दोषी को 10 साल की जेल, ₹8 लाख जुर्माना

नई दिल्ली: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद कड़ा और संवेदनशील फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने पड़ोसी 14 वर्षीय नाबालिग लड़के के साथ डिजिटल कुकर्म और यौन उत्पीड़न करने वाले एक व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) वैभव मेहता ने अपराध की क्रूरता को ध्यान में रखते हुए दोषी पर 8 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जुर्माने की यह पूरी राशि पीड़ित बच्चे को उसके पुनर्वास और मुआवजे के तौर पर दी जाएगी। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि इस घिनौनी हरकत ने मासूम बच्चे को गहरे शारीरिक और मानसिक आघात (Mental Trauma) में धकेल दिया है।

क्या था पूरा मामला?

यह दर्दनाक घटना नवंबर 2023 की है। दोषी मोहम्मद फरीद ने पड़ोस में रहने वाले इस बच्चे को बहला-फुसलाकर अपने घर बुलाया और उसका यौन उत्पीड़न किया। दरिंदगी यहीं नहीं रुकी, आरोपी ने इस पूरी वारदात का वीडियो भी बना लिया। इसके बाद उसने बच्चे को धमकी दी कि अगर उसने किसी को भी इस बारे में बताया, तो वह उसके पूरे परिवार को जान से मार डालेगा। इस खौफ के कारण मासूम बच्चा महीनों तक घुटता रहा और उसने किसी से कुछ नहीं कहा।

इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट होने के बाद खुला राज

घटना के करीब 10 महीने बाद, आरोपी ने उस आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद पीड़ित बच्चे ने हिम्मत जुटाई और अपने परिवार को आपबीती बताई, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

कोर्ट ने खारिज की बचाव पक्ष की दलीलें

ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष (Defense) ने केस को कमजोर करने के लिए कई तर्क दिए, जिन्हें अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया:

  • FIR में देरी पर कोर्ट का रुख: बचाव पक्ष का कहना था कि 10 महीने बाद एफआईआर दर्ज होना मामले को संदिग्ध बनाता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आरोपी की जान से मारने की धमकी के कारण बच्चा डरा हुआ था। इंस्टाग्राम पर वीडियो अपलोड होने के बाद उसका शिकायत दर्ज कराना पूरी तरह स्वाभाविक और तर्कसंगत है।

  • वीडियो से छेड़छाड़ का दावा फेल: डिफेंस ने दावा किया कि वीडियो एडिटेड है। लेकिन अदालत ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए साफ किया कि वीडियो पूरी तरह असली है और इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ या जालसाजी नहीं हुई है।

  • पैसों के विवाद का झूठा एंगल: आरोपी ने खुद को बेकसूर बताते हुए दावा किया था कि 5 से 10 हजार रुपये के आपसी लेन-देन के विवाद के कारण उसे फंसाया जा रहा है, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत माना।

पीड़ित बच्चे की अडिग गवाही बनी सजा का आधार

अदालत ने अपने फैसले में 14 वर्षीय पीड़ित की बहादुरी और उसकी गवाही को सबसे मुख्य आधार माना। जज वैभव मेहता ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि पुलिस शिकायत से लेकर, मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज धारा 164 के बयान और फिर कोर्ट ट्रायल के दौरान भी बच्चे का बयान पूरी तरह एक समान और अडिग रहा। कोर्ट ने कहा कि बच्चे की सच्चाई को साबित करने के लिए उसकी यह अटूट गवाही पूरी तरह पर्याप्त है।

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