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भ्रूण लिंग जांच मामले में चार दोषियों को सजा, डॉक्टर और दलाल को तीन-तीन साल की कैद

कुरुक्षेत्र। हरियाणा की कुरुक्षेत्र अदालत ने कोख में ही बेटियों को मारने वाली मानसिकता और अवैध लिंग जांच रैकेट के खिलाफ एक नजीर पेश करने वाला सख्त फैसला सुनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवेंद्र की अदालत ने गर्भ में भ्रूण लिंग जांच  के मामले में एक एमबीबीएस (MBBS) डॉक्टर, एक दलाल और टेस्ट कराने आए दंपती समेत चार लोगों को दोषी करार देते हुए जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों की दया याचिका को पूरी तरह खारिज करते हुए इस अपराध को महिलाओं की गरिमा और लैंगिक समानता पर सीधा प्रहार बताया है।

डॉक्टर और दलाल को 3-3 साल का कठोर कारावास

अदालत ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर (शांतिनगर) निवासी एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. कौशल कुमार और लाडवा (रविदास नगर) निवासी दलाल संदीप कुमार को पीसी-पीएनडीटी (PC-PNDT) एक्ट की विभिन्न धाराओं और आईपीसी की धारा 120-बी (साजिश रचने) के तहत दोषी पाया। दोनों को तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा और ₹5,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना न भरने पर उन्हें तीन महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

जांच कराने पहुंचे माता-पिता को भी 1 साल की जेल

अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल रैकेट चलाने वालों, बल्कि अवैध जांच को बढ़ावा देने वाले माता-पिता को भी नहीं बख्शा। करनाल (इन्द्री) के गोदपुर निवासी दंपती रेखा और रिंकू, जो अपने गर्भस्थ शिशु की लिंग जांच कराने पहुंचे थे, उन्हें पीसी-पीएनडीटी एक्ट की धारा 6(सी) के तहत एक-एक वर्ष के कठोर कारावास और ₹1,000 जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

‘सभ्य समाज के लिए गंभीर खतरा’ — अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान दोषियों ने अपने छोटे बच्चों, बीमार माता-पिता और पहली बार अपराध में शामिल होने का हवाला देकर कोर्ट से रहम की गुहार लगाई थी। मगर सरकारी वकील ने इसका कड़ा विरोध किया। न्यायाधीश ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि यह मामला समाज के लिए एक गंभीर खतरा है। यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवता और संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ एक गंभीर अपराध है, जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।

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