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बारिश में बच्चों पर सबसे ज्यादा मंडराता है मलेरिया का खतरा, इन शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां फैलने लगती हैं। इनमें मलेरिया बच्चों के लिए विशेष रूप से खतरनाक माना जाता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते लक्षणों की पहचान और उचित इलाज से मलेरिया को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

बच्चों में क्यों अधिक होता है मलेरिया का खतरा?

पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मलेरिया का जोखिम वयस्कों की तुलना में अधिक होता है। इसके पीछे कई कारण हैं—

  • बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं होती।
  • वे लंबे समय तक बाहर खेलते हैं, जिससे मच्छरों के संपर्क में अधिक आते हैं।
  • छोटे बच्चे अपनी परेशानी या लक्षण स्पष्ट रूप से नहीं बता पाते।
  • कुपोषण या कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
  • पहली बार मलेरिया परजीवी के संपर्क में आने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

अगर घर या आसपास गंदा पानी जमा रहता है या साफ-सफाई की कमी है, तो संक्रमण का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

बच्चों में मलेरिया के शुरुआती लक्षण

शुरुआत में मलेरिया के लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। ऐसे में इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए—

  • तेज बुखार
  • ठंड लगना और कंपकंपी
  • अत्यधिक पसीना आना
  • सिरदर्द
  • कमजोरी और थकान
  • छोटे बच्चों में लगातार रोना या चिड़चिड़ापन
  • दूध या खाना न खाना
  • सुस्ती और सामान्य गतिविधियों में कमी

यदि बच्चा ऐसे क्षेत्र में रहता है जहां मलेरिया के मामले अधिक हैं, तो इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

समय पर इलाज न मिलने पर क्या हो सकता है?

इलाज में देरी होने पर मलेरिया गंभीर रूप ले सकता है। इसके कारण—

  • दौरे पड़ सकते हैं।
  • बेहोशी की स्थिति हो सकती है।
  • सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
  • किडनी और लिवर प्रभावित हो सकते हैं।
  • गंभीर मामलों में शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, समय पर जांच और सही उपचार मिलने पर अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी होता है।

बच्चों को मलेरिया से कैसे बचाएं?

  • घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
  • बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं।
  • रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
  • मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें।
  • घर की नियमित साफ-सफाई रखें।
  • बुखार आने पर स्वयं दवा देने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

अस्वीकरण  :  यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यदि बच्चे को तेज बुखार या मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

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