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Vitamin B12 की कमी सिर्फ डाइट की गलती नहीं, कई आम दवाएं भी बिगाड़ रहीं हैं पोषण संतुलन

शरीर में विटामिन बी12 की कमी को लेकर अक्सर लोगों में यह भ्रम रहता है कि इसकी वजह केवल गलत खानपान है। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह पोषक तत्व तंत्रिका तंत्र की सेहत, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और एनर्जी बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से लगातार थकान, चक्कर, पैरों में झुनझुनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि आजकल बी12 की कमी तेजी से इसलिए बढ़ रही है क्योंकि लोग मेडिकल सलाह के बिना कई ऐसी दवाएं लगातार उपयोग कर रहे हैं, जो पाचन तंत्र में बी12 के अवशोषण को कम कर देती हैं।

एक हालिया वीडियो में डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने बताया कि एसिडिटी में दी जाने वाली दवाएं, एच-2 ब्लॉकर, एलर्जी की कुछ मेडिसिन, डायबिटिक मरीजों में इस्तेमाल होने वाली मेटफार्मिन और लंबे समय तक एंटीबायोटिक का प्रयोग, आंतों में मौजूद हेल्दी बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा देते हैं। यही बैक्टीरिया विटामिन बी12 के अवशोषण में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी कारण बी12 मात्रा कम होती-होती क्रॉनिक डेफिशिएंसी तक पहुंच जाती है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि कोई व्यक्ति पहले से ऐसी दवाएं ले रहा है, तो उन्हें अपने आप बंद न करे। सही तरीका यह है कि डॉक्टर की सलाह पर ही दवा की डोज, दवा बदलना या बी12 सप्लीमेंट जोड़ने की व्यवस्था की जाए।

डॉक्टरों के अनुसार डेयरी उत्पाद, अंडा, नॉनवेज, फोर्टिफाइड सीरियल्स जैसे स्रोत बी12 का अच्छा प्राकृतिक साधन हैं। वहीं अगर किसी को कमजोरी, मानसिक थकावट या नसों में झुनझुनी जैसे संकेत महसूस हों, तो अपने स्तर पर दवा लेने या सप्लीमेंट शुरू करने के बजाय पहले ब्लड टेस्ट करवा कर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

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