Breaking News
हाई ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा सकते हैं किडनी रोग का खतरा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
हाई ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा सकते हैं किडनी रोग का खतरा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
दून पुलिस की बड़ी कार्यवाही- किरायेदारों का सत्यापन न कराने पर 92 मकान मालिकों पर 9.20 लाख का जुर्माना
दून पुलिस की बड़ी कार्यवाही- किरायेदारों का सत्यापन न कराने पर 92 मकान मालिकों पर 9.20 लाख का जुर्माना
ओटीटी पर छाई प्रियंका चोपड़ा की ‘द ब्लफ’, व्यूअरशिप में बनी नंबर 1
ओटीटी पर छाई प्रियंका चोपड़ा की ‘द ब्लफ’, व्यूअरशिप में बनी नंबर 1
संसद में हर सदस्य को नियमों के तहत अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है- ओम बिरला
संसद में हर सदस्य को नियमों के तहत अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है- ओम बिरला
आईपीएल 2026 के पहले चरण का शेड्यूल जारी, 28 मार्च से होगा रोमांचक आगाज
आईपीएल 2026 के पहले चरण का शेड्यूल जारी, 28 मार्च से होगा रोमांचक आगाज
पीएमजीएसवाई प्रथम के अंतर्गत अवशेष सड़कों को पूरा करने की समय सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ी
पीएमजीएसवाई प्रथम के अंतर्गत अवशेष सड़कों को पूरा करने की समय सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ी
घरेलू गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं- महाराज
घरेलू गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं- महाराज
डॉल्फिन इंस्टीट्यूट में ‘क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन सह जागरूकता कार्यक्रम’ के दूसरे दिन भीमल हस्तशिल्प और उद्यमिता पर रहा विशेष जोर
डॉल्फिन इंस्टीट्यूट में ‘क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन सह जागरूकता कार्यक्रम’ के दूसरे दिन भीमल हस्तशिल्प और उद्यमिता पर रहा विशेष जोर
उत्तराखंड की पुष्पा कुकरेती ‘नेशनल सिविलियन अवॉर्ड 2026′ से सम्मानित
उत्तराखंड की पुष्पा कुकरेती ‘नेशनल सिविलियन अवॉर्ड 2026′ से सम्मानित
जो जमीनी हालात हैं

मीडिया हेडलाइन्स से भारत की खुशनुमा तस्वीर उकेरने की कोशिश अक्सर होती रहती है। लेकिन जो जमीनी हालात हैं, वे इससे नहीं बदल सकते। विडंबना है कि इन हालात को बदलने की कोशिश के बजाय विकसित भारत का खोखला सपना दिखाया जा रहा है। अभी हाल में 2023-24 के अनुमानित सरकारी आर्थिक आंकड़े जारी हुए, तो उनसे पता चला कि इस वित्त वर्ष में (दो अपवाद वर्षों को छोड़ कर) भारत की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि 21 वर्ष के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। इस वर्ष यह वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही। बीते 21 वर्षों में सिर्फ 2019-20 और 2020-21 में ये दर इससे कम रही थी, जब सारी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में थी। एक अंग्रेजी वेबसाइट ने अपने विश्लेषण से बताया है कि चालू वित्त वर्ष में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भारी गिरावट आई है।

अप्रैल से सितंबर तक देश में सिर्फ 10.1 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया। इसके पहले (इस अवधि में) इतनी कम एफडीआई 2007-08 में आई थी। देश में औसत आम उपभोग का कमजोर बने रहना अब एक स्थायी हेडलाइन है। ताजा खबर यह है कि अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में एफएमसीजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलिवर लिमिटेड का मुनाफा अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं बढ़ सका। कंपनी ने इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मांग की कमजोर स्थिति को बताया है। ये सारी खबरें अलग-थलग नहीं हैं। बल्कि उस गंभीर आम माली हालत का सूचक हैं, जो लगातार गंभीर हो रही है।

दरअसल, जिस देश में कामकाजी उम्र वर्ग की लगभग 50 फीसदी आबादी सवा लाख रुपये से कम वार्षिक आय पर गुजारा करती हो, वहां महंगाई एवं सामाजिक सुरक्षाओं में कटौती का परिणाम इसी रूप में सामने आ सकता है। इस स्थिति का निहितार्थ यह है कि भारत के एक सशक्त बाजार के रूप में उभर सकने की संभावनाएं सीमित बनी हुई हैं। यह अवश्य है कि लगभग छह-सात करोड़ लोगों का एक उपभोक्ता वर्ग हमारे देश में मौजूद है और जो मौजूदा वैश्विक आर्थिक-राजनीति सूरत के बीच बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसलिए मीडिया हेडलाइन्स से भारत की खुशनुमा तस्वीर उकेरने की कोशिश अक्सर होती रहती है। लेकिन जो जमीनी हालात हैं, वे ऐसे प्रयासों से नहीं बदल सकते। विडंबना यह है कि इन हालात को बदलने की कोशिश के बजाय विकसित भारत का खोखला सपना दिखाया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top