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देहरादून- भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने सदन मे सरकार अतारांकित प्रश्न संख्या-746 के माध्यम से रेलवे मे कवच 4.0 को आरंभ करना से संबंधित प्रश्न किया।

डा. नरेश बंसल ने प्रश्न किया कि क्या रेल मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः

क- कवच 4.0 को लागू करने में कितनी प्रगति हुई जिसमें अब तक कवर किए गए किलोमीटर में मार्ग और लोकोमोटिव शामिल है
ख- वर्ष 2026-27 के दौरान उत्तर प्रदेश सहित इसे लागू करने के लिए पहचान किए गए रेलवे जोन आौर अधिक यातायात वाले राज्य-वार और जिला-वार गलियारे कौन-कौन से हैं
ग- क्या कवच को नेटवर्क बार लागू करने के लिए कोई समय-सीमा तय की गई है, यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और
घ- भारतीय रेल नेटवर्क पर कवच की संस्थापना और संचालन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?

इस महत्वपूर्ण जनहित के प्रश्न के उत्तर मे रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने जवाब दिया कि-

क से घ- कवच एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित रेलगाडी सुरक्षा प्रणाली (एटीपी) है। कवच अत्यधिक प्रौद्योगिकी प्रधान प्रणाली है, जिसके लिए सर्वोच्च स्तर के संरक्षा प्रमाणन (एसआईएल-4) की आवश्यकता होती है।

2- यदि लोको पायलट ब्रेक लगाने में विफल रहता है तो कवच स्वचालित ब्रेक लगाकर लोको पायलट को निर्दिष्ट गति सीमा के भीतर रेलगाडी चलाने में सहायता प्रदान करता है और यह खराब मौसम के दौरान रेलगाडी को संरक्षित ढ़ंग से चलाने में भी सहायता करता है।

3- यात्री गाडियों पर पहला फील्ड परीक्षण फरवरी, 2016 में शुरू किया गया था। इस प्रकार प्राप्त अनुभव और निष्पक्ष संरक्षा मूल्यांकनकर्ता (आईएसए) द्वारा प्रणाली के निष्पक्ष संरक्षा मूल्यांकन के आधार पर कवच संस्करण 3.2 की आपूर्ति के लिए 2018-19 में तीन फर्मों को अनुमोदित किया गया था।

4- कवच को जुलाई, 2020 में राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया।

5- कवच प्रणाली के कार्यान्वयन में निम्नलिखित कार्यकलाप शामिल हैं।
क- प्रत्येक स्टेशन, ब्लाॅक खण्ड पर स्टेशन कचव का संस्थापन
ख- पूरे रेलपथ की लंबाई में आरएफआईडी टैग का संस्थापन
ग- समग्र खंड में दूरसंचार टावरों का संस्थापन।
घ- रेलपथ के बगल में आॅप्टिकल फाइबर केवल बिछाना
ड- भारतीय रेल पर चल रहे प्रत्येक रेल इंजन पर लोको कवच का प्रावधान

6- दक्षिण मध्य रेल के 1465 मार्ग किलोमीटर पर कवच संस्करण 3.2 के संस्थापन और प्राप्त अनुभव के आधार पर आगे और सुधार किए गए थे। अंततः आरडीएओ द्वारा दिनांक 16.07.2024 को कवच विशिष्ट संस्करण 4.0 अनुमोदित किया गया था।

7- कवच 4.0 संस्करण में विविध रेल नेटवर्क के लिए आवश्यक सभी प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं। यह भारतीय रेल की संरक्षा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अल्प अवधि के भीतर, भारतीय रेल ने स्वचालित रेलगाडी सुरक्षा प्रणाली को विकसित, परीक्षित और संस्थापित करना शुरू कर दिया है।

8- कवच संस्करण 4.0 में किए गए प्रमुख सुधारों में अवस्थिति सटीकता में वृद्धि, बडे यार्डों में सिग्नल संबंधी पहलुओं की बेहतर जानकारी, ओएफसी पर स्टेशन से स्टेशन कवच इंटरफेस और मौजूदा इलेक्ट्रोनिक इंटरलाॅकिंग प्रणाली से सीधा इंटरफेस शामिल है। इन सुधारों के साथ, कवच संस्करण 4.0 को भारतीय रेल में बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है।

9- व्यापक और विस्तृत परीक्षणों के उपरांत, कवच संस्करण 4.0 को 13.07.2026 तक 2490 मार्ग किलोमीटर पर सफलतापूर्वक चालू किया गया है, जिनमें उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले खंडो सहित नीचे दिए अनुसार उच्च घनत्व वाले दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावडा मार्ग शामिल हैं
1- दिल्ली-मुंबई मार्गः 1344
2- दिल्ली-हावडा मार्गः 1146

10- इसके अलावा, उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले भारतीय रेल के सभी जीक्यू, जीडी, एचडीएन और चिन्हित खंडों को कवर करते हुए 21937 मार्ग किलोमीटर पर रेलपथ साइड कवच कार्यों का कार्यान्वयन किया जा रहा है।

11- भारतीय रेलखंडों पर कवच की प्रमुख मदों की कुल प्रगति निम्नानुसार है-
1- मद- आॅप्टिकल फाइबर केवल बिछाना प्रगति- 11253 कि.मी.
2- मद- दूरसंचार टावरों का संस्थापन प्रगति- 1668 अदद
3- मद- स्टेशन डेटा संेटर प्रगति- 958 स्टेशन
4- रेलपथ साइड उपकरणों का संस्थापन 7721 मार्ग कि0मी0
5- रेलइंजनों में कवच का प्रावधान 6045 अदद

12-इसके अतिरिक्त 7435 रेल इंजनों और 1200 ईएमयू/एमईएमयू में कवच की संस्थापना कार्य शुरू किया गया है।

13- सभी संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए भारतीय रेल के केंद्रीकृत प्रशिक्षण संस्थानों में कवच पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक 94000 से अधिक तकनीशियनों, आॅपरेटरों और इंजीनियरों को कवच प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसमें लगभग 57,000 लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट सम्मिलित है। यह पाठ्यक्रम इरिसेट के सहयोग से तैयार किया गया है।

14- जून, 26 तक कवच प्रणाली से संबंधित कार्यों पर कुल 3874.9 करोड़ रूपए की राशि व्यय की गई है। वर्ष 2026-27 के दौरान 2066.24 करोड़ की धनराशि का आवंटन हुआ है। उत्तर प्रदेश सहित देश के सभी भागों में कवच का कार्य तेज गति से चल रहा है। कार्यों की प्रगति के अनुरूप अपेक्षित पूंजी उपलब्ध कराई गई है।

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