Breaking News
SSC परीक्षा में हाईटेक नकल कराने वाले गिरोह का एक और सदस्य दिल्ली से गिरफ्तार
SSC परीक्षा में हाईटेक नकल कराने वाले गिरोह का एक और सदस्य दिल्ली से गिरफ्तार
गैरसैंण में दो विधानसभा सत्र आयोजित करना सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक: सीएम धामी
गैरसैंण में दो विधानसभा सत्र आयोजित करना सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक: सीएम धामी
नैनीताल में पर्यटन स्वरोजगार और होमस्टे योजनाओं को बढ़ावा, 31 आवेदन स्वीकृत
नैनीताल में पर्यटन स्वरोजगार और होमस्टे योजनाओं को बढ़ावा, 31 आवेदन स्वीकृत
हल्द्वानी में फार्मर रजिस्ट्री को लेकर डीएम ने किसानों से की अपील
हल्द्वानी में फार्मर रजिस्ट्री को लेकर डीएम ने किसानों से की अपील
नशा तस्करों पर पुलिस का शिकंजा, गैंगस्टर समेत 4 गिरफ्तार
नशा तस्करों पर पुलिस का शिकंजा, गैंगस्टर समेत 4 गिरफ्तार
श्रीनगर से सड़क मार्ग से देहरादून लौटते हुए मुख्यमंत्री धामी ने किया राष्ट्रीय राजमार्ग का स्थलीय निरीक्षण
श्रीनगर से सड़क मार्ग से देहरादून लौटते हुए मुख्यमंत्री धामी ने किया राष्ट्रीय राजमार्ग का स्थलीय निरीक्षण
ठाणे में 5 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला
ठाणे में 5 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला
सरकार ने अनुपूरक बजट में हर वर्ग के कल्याण पर फ़ोकस किया है: महाराज
सरकार ने अनुपूरक बजट में हर वर्ग के कल्याण पर फ़ोकस किया है: महाराज
फर्जी दस्तावेजों से MBBS में दाखिले का मामला: एसआईटी ने तीन और आरोपियों को किया गिरफ्तार
फर्जी दस्तावेजों से MBBS में दाखिले का मामला: एसआईटी ने तीन और आरोपियों को किया गिरफ्तार
दूषित पानी से बढ़ता स्वास्थ्य खतरा, केवल दस्त ही नहीं लीवर और किडनी भी होती है प्रभावित

स्वच्छ पानी को स्वास्थ्य की बुनियाद माना जाता है, लेकिन जब यही पानी दूषित हो जाए तो यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। अक्सर गंदे पानी से होने वाली बीमारी को केवल दस्त या डायरिया तक सीमित समझ लिया जाता है, जबकि चिकित्सकों के अनुसार अशुद्ध जल शरीर के कई अहम अंगों पर सीधा असर डालता है। दूषित जल में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी शरीर में प्रवेश कर पाचन तंत्र से होते हुए लीवर, किडनी और तंत्रिका तंत्र तक को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सीवरेज और औद्योगिक अपशिष्ट से बढ़ता जोखिम

जब जल स्रोतों में सीवरेज का पानी या औद्योगिक कचरा मिल जाता है, तो वह पानी गंभीर संक्रामक रोगों का माध्यम बन जाता है। कई बार पानी दिखने में साफ होता है, लेकिन पाइपलाइन लीकेज या टंकी की गंदगी के कारण उसमें सूक्ष्म जीव मौजूद रहते हैं। ऐसे में हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में।

डिहाइड्रेशन से लेकर किडनी तक असर

गंदा पानी पीने से होने वाले संक्रमण सिर्फ शरीर से पानी की कमी तक सीमित नहीं रहते। इन बीमारियों के कारण इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन पैदा होता है, जिससे किडनी फेल होने, कमजोरी और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

टाइफाइड और हैजा का बड़ा कारण दूषित जल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार टाइफाइड और हैजा का मुख्य कारण अशुद्ध पानी है। टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया से होता है, जो तेज बुखार और आंतों में गंभीर संक्रमण पैदा करता है। वहीं हैजा में शरीर से पानी इतनी तेजी से बाहर निकलता है कि कुछ ही घंटों में मरीज की हालत बिगड़ सकती है। ये रोग दूषित जल के जरिए तेजी से फैलते हैं।

हेपेटाइटिस A और E से लीवर को खतरा

अशुद्ध पानी पीने से हेपेटाइटिस ए और ई जैसे वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ये संक्रमण सीधे लीवर को प्रभावित करते हैं, जिससे पीलिया, थकान, उल्टी और भूख न लगने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। डॉक्टरों के अनुसार हेपेटाइटिस ई गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है और इससे रिकवरी में लंबा समय लग सकता है।

पेचिश और आंतों के संक्रमण

दूषित पानी में मौजूद परजीवी पेचिश और पेट में कीड़ों की समस्या पैदा करते हैं। इसके लक्षणों में पेट दर्द, मरोड़ और मल के साथ खून आना शामिल है। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से आंतों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे शरीर पोषक तत्वों को सही तरह से अवशोषित नहीं कर पाता। बच्चों में यह स्थिति कुपोषण और विकास संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।

बचाव ही सबसे बेहतर उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पानी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए सबसे जरूरी है सुरक्षित और शुद्ध जल का उपयोग। पानी को उबालकर पीना, क्लोरीन टैबलेट का इस्तेमाल और जल भंडारण के बर्तनों को साफ रखना प्रभावी उपाय माने जाते हैं। खुले में बिकने वाले पेय पदार्थों और बर्फ से परहेज करना भी जरूरी है। बुखार, दस्त या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।

नोट: यह लेख विभिन्न चिकित्सा रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

(साभार)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top