कानपुर। कार लोन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने के आरोप में फरार चल रहे पिता-पुत्र को बर्रा पुलिस ने करीब 15 साल बाद उज्जैन के नानाखेड़ा बस स्टैंड से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई से बचने के लिए दोनों ने बर्रा-दो स्थित अपना मकान बेच दिया था और उज्जैन जाकर रहने लगे थे। गिरफ्तार आरोपितों पर कुल 75 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इनमें संजय अग्रवाल पर 50 हजार और उसके बेटे राहुल पर 25 हजार रुपये का इनाम था।
डीसीपी दक्षिण दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि वर्ष 2011 में बैंक ऑफ बड़ौदा की बर्रा-दो स्थित चंदेल मार्केट शाखा के प्रबंधक केवी त्रिपाठी ने गोविंद नगर निवासी हरिश्चंद्र अरोड़ा और रामआसरे नगर निवासी संतोष गुप्ता के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2009 में आरोपितों ने बैंक कर्मचारी अभय कुमार के माध्यम से जीटी रोड स्थित मेसर्स क्रास रोड मोटर्स से कार खरीदने के लिए 3.50 लाख रुपये का लोन लिया था। आरोप है कि लोन लेने के बाद कार के रजिस्ट्रेशन पेपर और बीमा संबंधी दस्तावेज बैंक में जमा नहीं किए गए। इसके बाद लोन की रकम ब्रह्मावर्त कारपोरेशन बैंक से चेक के जरिए कैश कराकर हड़प ली गई।
जांच आगे बढ़ने पर हरिश्चंद्र और संतोष के साथ संजय अग्रवाल, उसके बेटे राहुल और मनोज सिंह के नाम भी सामने आए। पुलिस ने 25 अगस्त को मनोज सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस के अनुसार, संजय के खिलाफ बर्रा थाने में नौ मुकदमे दर्ज हैं, जबकि राहुल के खिलाफ रायपुरवा और बर्रा थानों में 24 मामले दर्ज हैं।
मकान बेचकर उज्जैन चले गए थे: एडीसीपी दक्षिण ऑपरेशन सुमित सुधारक रामटेके ने बताया कि वर्ष 2011 से पहले संजय और उसका बेटा राहुल बर्रा-दो में रहते थे। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस का दबाव बढ़ा तो दोनों ने अपना मकान बेच दिया और उज्जैन के नानाखेड़ा में जाकर रहने लगे। पुलिस के मुताबिक, संजय वहां संजीव राज गोयल के नाम से रह रहा था। लंबे समय से फरार चल रहे दोनों को पुलिस ने अब गिरफ्तार कर लिया है।

