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नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया और राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत, ईडी की याचिका पर कोर्ट का इनकार

खरगे का आरोप- जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है सरकार

नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने धनशोधन के आरोपों से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति करार दिया है, वहीं पार्टी नेताओं ने कहा कि कानून ने अपना काम किया है और आरोपों में कोई ठोस आधार नहीं पाया गया।

कांग्रेस ने बताया राजनीतिक उत्पीड़न का मामला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड मामला शुरू से ही राजनीतिक बदले और उत्पीड़न की कहानी रहा है। उन्होंने कहा कि अदालत का रुख यह स्पष्ट करता है कि शोर-शराबे के बजाय कानून तथ्यों के आधार पर निर्णय करता है।

खरगे का आरोप—जांच एजेंसियों का हो रहा दुरुपयोग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि केंद्र सरकार ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी परिवार को निशाना बनाने के लिए इस तरह के मामले खड़े किए गए हैं, जबकि इनमें कोई ठोस एफआईआर तक दर्ज नहीं है। खरगे ने दावा किया कि कई कांग्रेस नेताओं पर इसी तरह दबाव बनाने की कोशिश की गई है।

सोनिया और राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत
अदालत के फैसले से कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को राहत मिली है। कोर्ट ने ईडी द्वारा दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल आरोप तय करने का आधार नहीं बनता। ईडी ने दोनों नेताओं पर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से जुड़ी करीब 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया था।

हालांकि, अदालत ने ईडी को जांच जारी रखने की अनुमति दी है और स्पष्ट किया है कि एजेंसी आगे तथ्यों और साक्ष्यों को एकत्र कर सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ईडी का मामला किसी प्राथमिकी पर नहीं, बल्कि एक निजी शिकायत और मजिस्ट्रेट के समन आदेश पर आधारित है।

नेशनल हेराल्ड मामला क्या है?
एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की स्थापना 1937 में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों का प्रकाशन करना था। एजेएल के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज प्रकाशित होते थे। यह कंपनी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हजारों स्वतंत्रता सेनानियों की हिस्सेदारी वाली संस्था थी। समय के साथ अखबार आर्थिक संकट में आ गए और 2008 में प्रकाशन बंद करना पड़ा। इसके बाद कंपनी की संपत्तियों और कर्ज को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

2012 में दर्ज हुआ था मामला
वर्ष 2012 में भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराया। स्वामी ने आरोप लगाया कि यंग इंडिया लिमिटेड के माध्यम से एजेएल की बहुमूल्य संपत्तियों को गलत तरीके से हासिल किया गया।

स्वामी का दावा था कि एजेएल पर कांग्रेस पार्टी का करीब 90 करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे नाममात्र की राशि में अपने अधिकार में लिया गया। वहीं कांग्रेस का कहना है कि पूरा मामला राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और इसमें कोई आपराधिक तत्व नहीं है।

अदालत के ताजा फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है, जबकि कानूनी प्रक्रिया अपने स्तर पर आगे बढ़ती रहेगी।

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