बरेली। इंटरनेट मीडिया पर तीन दिन में शुगर ठीक करने का दावा कर लोगों को ठगने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने रविवार को साजिद, इस्लाम और मोहम्मद जफर को गिरफ्तार किया। आरोपित जरूरतमंदों से दवा के नाम पर आर्डर लेते थे और बाद में नकली दवाएं कोरियर के जरिए भेजते थे। गिरोह ने आर्डर और डिलीवरी के लिए फर्जी वेबसाइट और काल सेंटर भी बना रखा था।
आरंभिक जांच में सामने आया कि आरोपित जिन दवाओं को जरूरतमंदों तक भेजते थे, उन पर न तो निर्माता का नाम लिखा था और न ही निर्माण वर्ष की जानकारी थी। दवाओं की गुणवत्ता जांच से संबंधित कोई प्रमाण भी नहीं मिला। पुलिस अब गिरोह के दो अन्य आरोपितों रऊफ और रिजवान की तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार भोजीपुरा निवासी साजिद मलिक ने ठगी का यह जाल तैयार किया था। शुगर के मरीजों को निशाना बनाने के लिए गिरोह ने उन्हें बीमारी ठीक करने का दावा करते हुए इंटरनेट मीडिया पर विज्ञापन दिए। इसके बाद जरूरतमंद लोग वेबसाइट के माध्यम से दवा का आर्डर करते थे।
गिरोह के सदस्य फोन पर ग्राहकों से दवा की कीमत और डिलीवरी के संबंध में बात करते थे। उन्हें बताया जाता था कि दवा कंपनी उत्तराखंड में है और वहीं से दवा भेजी जाएगी। दवाओं की कीमत 1000 से 1450 रुपये के बीच रखी जाती थी।
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य सैलानी में यादगार रेस्टोरेंट के पास स्थित एक मकान में नकली दवाओं की पैकिंग और डिलीवरी का काम करते थे। पुलिस ने रविवार को छापेमारी कर साजिद, इस्लाम और मोहम्मद जफर को गिरफ्तार किया। मौके से 75 डिब्बों में दवाएं मिलीं। आरोपितों के पास दवाओं की बिक्री का लाइसेंस भी नहीं था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित कुछ दुकानों से जड़ी-बूटियां और गोलियां लेकर उनकी पैकिंग कराते थे। पैकिंग पर आरके इंटरप्राइजेज, डियाबो-वीटा केयर, अयूर लाइफ और हमदम फार-ऐवर इंडिया जैसे नाम छपवाए जाते थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में ये सभी कंपनियां फर्जी पाई गई हैं।
गिरोह में रऊफ और रिजवान मियां भी शामिल बताए गए हैं। रऊफ और साजिद सगे भाई हैं। साजिद, रऊफ और पीलीभीत निवासी रिजवान ने कंपनी बनाई थी। दवा बनाने और पैकिंग का काम रऊफ व रिजवान देखते थे, जबकि इस्लाम इंटरनेट मीडिया पर प्रचार करता था।
एएसपी आशुतोष शिवम ने बताया कि गिरोह के पांचों सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। यह भी जांच की जा रही है कि शुगर की दवा के नाम पर ग्राहकों को कौन सी गोलियां दी जा रही थीं और उनकी गुणवत्ता क्या थी।
