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कान साफ करने के लिए ईयरबड्स का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

कान हमारे शरीर का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग है, जिसकी सही देखभाल करना जरूरी है। अक्सर लोग कानों की सफाई के लिए कॉटन वाले ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे सुरक्षित नहीं मानते। डॉक्टरों के मुताबिक, गलत तरीके से कान साफ करना कई बार संक्रमण, चोट और सुनने की समस्या तक पैदा कर सकता है। इसलिए कानों की सफाई को लेकर सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे कान खुद को साफ रखने की प्राकृतिक क्षमता रखते हैं। कान के अंदर बनने वाला ईयरवैक्स (मैला) कई लोगों को गंदगी लगता है, जबकि वास्तव में यह कानों के लिए एक सुरक्षात्मक परत का काम करता है। यह धूल, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्वों को कान के अंदर जाने से रोकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग कान साफ करने के लिए कॉटन प्लग या ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह तरीका सुरक्षित नहीं है। इससे अक्सर वैक्स बाहर निकलने की बजाय और अंदर की ओर चला जाता है, जिससे कान में ब्लॉकेज बनने की आशंका बढ़ जाती है। इस स्थिति में कान बंद होने जैसा महसूस होना, सुनाई कम देना और असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि कान के अंदर की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है। ऐसे में ईयरबड्स या किसी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल करने से कान के अंदर खरोंच या चोट लग सकती है। यदि कान में चोट लग जाए तो वहां बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कान केवल सुनने के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर के संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए कान में किसी भी तरह की चोट या समस्या होने पर चक्कर आना या संतुलन बिगड़ने जैसी परेशानी भी हो सकती है।

इसके अलावा, अगर कॉटन प्लग गलती से ज्यादा अंदर चला जाए तो यह कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। कई मामलों में ईयरबड्स के गलत इस्तेमाल से कान के पर्दे को नुकसान पहुंचने तक की स्थिति बन जाती है। बार-बार ईयरबड्स इस्तेमाल करने से कान में सूखापन, खुजली और ज्यादा वैक्स बनने की समस्या भी हो सकती है।

डॉक्टरों की सलाह है कि कानों की सफाई के लिए ईयरबड्स का नियमित इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। यदि कान में ज्यादा वैक्स जमा हो जाए, दर्द हो या सुनने में परेशानी महसूस हो तो खुद से उपचार करने के बजाय किसी ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।

नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

(साभार)

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