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ठंड क्यों बढ़ा देती है निमोनिया का खतरा? आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

सर्दियों की शुरुआत के साथ ही हवा में ठंडक और नमी बढ़ जाती है, जो कई मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ाने लगती है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान वायरस और बैक्टीरिया अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इन्हीं संक्रमणों में सबसे खतरनाक है—निमोनिया, जो हर साल बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करता है और गंभीर मामलों में जान के लिए भी खतरा बन जाता है।

निमोनिया: सर्दियों में तेजी से फैलने वाला संक्रमण

निमोनिया फेफड़ों में होने वाला गंभीर इंफेक्शन है, जो वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के कारण विकसित हो सकता है। इसके लक्षणों में लगातार खांसी, तेज बुखार, सांस फूलना, थकान और छाती में दर्द शामिल हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों में इसके गंभीर होने का जोखिम और अधिक रहता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में हर साल लाखों बच्चों की मौत निमोनिया से होती है। ठंड के मौसम में यह आंकड़ा और बढ़ जाता है, इसलिए इस समय बच्चों व बुजुर्गों की अतिरिक्त देखभाल जरूरी है।

ठंड क्यों बढ़ा देती है निमोनिया का खतरा?

एक्सपर्ट बताते हैं कि सर्दियों में बच्चे घरों के अंदर अधिक समय बिताते हैं, जिससे संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने का जोखिम बढ़ जाता है। साथ ही—

सूरज की कम रोशनी के कारण विटामिन D की कमी

प्रदूषण और धुएं का बढ़ा संपर्क

ठंड में शरीर की प्रतिरक्षा का कमजोर होना

दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन

ये सभी कारक बच्चों और बुजुर्गों में निमोनिया संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।

विशेषज्ञों की राय

श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. एन.आर. चौहान बताते हैं कि ठंड सीधे तौर पर निमोनिया का कारण नहीं बनती, लेकिन यह ऐसे वातावरण को जन्म देती है जिसमें संक्रमण तेजी से फैलता है। हवा का सूखापन फेफड़ों में जलन पैदा करता है, जिससे संक्रमण आसानी से पकड़ लेता है।

वे बताते हैं कि डायबिटीज, अस्थमा, सीओपीडी और कमजोर फेफड़ों वाले लोगों में गंभीर निमोनिया होने की आशंका ज्यादा रहती है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में तो यह जोखिम और भी बढ़ जाता है।

निमोनिया से बचाव कैसे करें?
1. वैक्सीन जरूर लगवाएं

न्यूमोकोकल और इन्फ्लूएंजा वैक्सीन निमोनिया से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चों को समय पर सभी टीके लगवाना उनकी सुरक्षा की मजबूत ढाल मानी जाती है।

2. बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी

बच्चे को गर्म कपड़े पहनाएं

साफ-सफाई बनाए रखें

खिलौनों की नियमित सफाई करें

बीमार लोगों से दूरी रखें

बार-बार हाथ धोने की आदत डालें

3. स्वच्छता और मास्क का प्रयोग

डॉक्टरों के अनुसार, निमोनिया से बचाव के लिए स्वच्छता बहुत महत्वपूर्ण है। हाथ धोना, मास्क पहनना और फ्लू जैसे लक्षण वाले लोगों से दूर रहना संक्रमण के खतरे को काफी हद तक रोकता है।

4. मां का दूध और पौष्टिक आहार

अध्ययनों से पता चलता है कि मां का दूध शिशुओं की प्रतिरक्षा को मजबूत रखता है। बड़े बच्चों को विटामिन C, विटामिन D और जिंक से भरपूर चीजें खिलाना चाहिए, जिससे फेफड़े मजबूत रहते हैं।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

अगर किसी व्यक्ति को—

बलगम वाली खांसी कई दिनों तक बनी रहे

तेज बुखार उतर न रहा हो

सांस लेने में परेशानी हो

सीने में दर्द हो

तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर निमोनिया गंभीर रूप ले सकता है।

(साभार)

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