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20 मार्च तक जनपद की सभी सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूर्ण करें- जिलाधिकारी

जिला सहकारी विकास समिति की बैठक में सहकारिता समितियों को सशक्त कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने पर जोर

सरकारी देयों की वसूली में लापरवाही पर जिलाधिकारी ने जतायी कड़ी नाराजगी, कहा, बेहतर प्रदर्शन करने वाली समितियों को किया जाएगा सम्मानित

पौड़ी। जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में जिला सहकारी विकास समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में सहकारिता विभाग की विभिन्न योजनाओं, समितियों की प्रगति तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता तंत्र को सशक्त बनाने के संबंध में विस्तृत समीक्षा की गयी।

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सहकारी देयों की वसूली की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वसूली कार्य में एमपैक्स के सचिवों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन एमपैक्स (बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों) द्वारा 50 प्रतिशत से कम वसूली की गई है, उनके सचिवों का वेतन रोके जाने की भी कार्यवाही की जाए। वहीं 90 प्रतिशत से अधिक वसूली करने वाली समितियों को प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित करने के निर्देश भी दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में अभी तक सहकारी समितियों का गठन नहीं हुआ है, वहां नयी बहुउद्देशीय समितियों के गठन की प्रक्रिया तेज की जाय, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। साथ ही समितियों को राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस में शत-प्रतिशत पंजीकृत करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने सहकारी समितियों को जन सेवा केंद्र के रूप में अधिक सक्रिय बनाए जाने तथा उनकी आय बढ़ाने के लिए नए अवसरों और संभावनाओं को चिन्हित किए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां भी आर्थिक गतिविधियों की संभावनाएं हैं, वहां योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हुए समितियों को आत्मनिर्भर बनाया जाए। इसके लिए जिला सहकारिता निबंधक को प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने को भी कहा गया।

जिलाधिकारी ने समितियों को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को एक ही स्थान पर कृषि से संबंधित आवश्यक सेवाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। साथ ही एमपैक्स के माध्यम से नए एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) गठित करने तथा उन्हें विपणन केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे किसानों को अपनी उपज के बेहतर विपणन के अवसर मिल सकें। साथ ही एफपीओ की नियमित निगरानी करने तथा उनके माध्यम से दी जा रही सेवाओं के प्रभाव का मूल्यांकन करने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि समितियों के माध्यम से जनसेवाओं के बेहतर वितरण पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा इनके सकारात्मक प्रभाव का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इनसे लाभान्वित हो सकें।

बैठक में जिलाधिकारी ने सुझाव दिया कि अन्न भंडारण की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कृषि उत्पादन मंडी समिति के गोदामों का उपयोग किया जा सकता है, जिससे भंडारण क्षमता का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

बैठक के दौरान जिला सहकारिता निबंधक सौरभ कुमार द्वारा सहकारिता विभाग के अंतर्गत संचालित योजनाओं, समितियों की गतिविधियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। बैठक में सहकारी समितियों के माध्यम से पशु चिकित्सा केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। साथ ही समितियों के आधुनिकीकरण के तहत पैक्स कंप्यूटरीकरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जनपद की कुल 114 समितियों में से 95 समितियों का कंप्यूटरीकरण पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष समितियों के लिए ई-पैक्स के तहत कार्य प्रगति पर है।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे

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