Breaking News
एसजीआरआरयू में स्कूल आॅफ हाॅस्पिटैलिटी एण्ड टूरिज्म मैनेजमेंट के अत्याधुनिक भवन का भव्य उद्घाटन
एसजीआरआरयू में स्कूल आॅफ हाॅस्पिटैलिटी एण्ड टूरिज्म मैनेजमेंट के अत्याधुनिक भवन का भव्य उद्घाटन
उत्तराखंड में जीएसटी संग्रहण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, नेट एसजीएसटी 24% बढ़ा
उत्तराखंड में जीएसटी संग्रहण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, नेट एसजीएसटी 24% बढ़ा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया अपने पद से इस्तीफा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया अपने पद से इस्तीफा
क्राइम मीटिंग में एसएसपी का कडा रूख, लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारियों को दी सख्त हिदायत
क्राइम मीटिंग में एसएसपी का कडा रूख, लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारियों को दी सख्त हिदायत
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.23 अरब डॉलर पहुंचा, आरबीआई के ताजा आंकड़े जारी
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.23 अरब डॉलर पहुंचा, आरबीआई के ताजा आंकड़े जारी
भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज
भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज
‘जन नायकन’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा, दो दिन में पार किया 50 करोड़ का आंकड़ा
‘जन नायकन’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा, दो दिन में पार किया 50 करोड़ का आंकड़ा
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक
ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंसः हर युवा का भविष्य बचाना हमारी प्राथमिकता- डीएम
ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंसः हर युवा का भविष्य बचाना हमारी प्राथमिकता- डीएम
UCC विधेयक पर लगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मुहर, नियमावली बनते ही उत्तराखंड में होगा लागू

देहरादून। पिछले महीने उत्तराखंड विधानसभा में पारित विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ से मंजूरी दिए जाने के बाद उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) कानून बन गया है। यह कानून उत्तराखंड में विवाह, तलाक, संपत्ति की विरासत के लिए एक सामान्य कानून प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। यह कानून राज्य के अंदर या बाहर रहने वाले निवासियों के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाता है। लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे वैध माने जाएंगे। इसके अलावा, अपने लिव-इन पार्टनर की तरफ से छोड़ी गई महिलाएं भरण-पोषण की हकदार होंगी।

यह कानून मुसलमानों के एक वर्ग में प्रचलित बहुविवाह और ‘हलाला’ पर भी प्रतिबंध लगाता है। हालांकि, यह कानून आदिवासियों पर उनकी परंपराओं, प्रथाओं और अनुष्ठानों के संरक्षण के लिए लागू नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top